सुख शांति में समाज के लिए अध्यात्म और सकारात्मक विचारों का संगम अनिवार्य- डॉक्टर कुलदीप सारस्वत

*सुख-शांतिमय समाज के लिए अध्यात्म और सकारात्मक विचारों का संगम अनिवार्य: डॉ. कुलदीप सारस्वत* 
 *सुख-शांतिमय समाज के लिए अध्यात्म और सकारात्मक विचारों का संगम अनिवार्य: डॉ. कुलदीप सारस्वत* 
 ब्रह्माकुमारीज़ के 'मूल्य उपवन' में वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस एवं राजयोगिनी दादी जानकी जी की छठी पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में  मथुरा से प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एवं मोटिवेशनल लेखक एवं शुभम विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. कुलदीप सारस्वत उपस्थित रहे।
 "सुख शांतिमय समाज के निर्माण में अध्यात्म की भूमिका" में सभा को संबोधित करते हुए डॉ. कुलदीप सारस्वत ने मनोविज्ञान और अध्यात्म के तालमेल पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि "आज का समाज बाहर से बहुत विकसित दिख रहा है, लेकिन आंतरिक रूप से अशांत है। सुख कोई बाहरी वस्तु नहीं, बल्कि एक आंतरिक संस्कार है।"
​डॉ. सारस्वत ने दादी जानकी जी के 'बीती बातों पर बिंदी' (Full Stop) लगाने के सिद्धांत को मनोवैज्ञानिक रूप से तनाव मुक्ति का सबसे बड़ा सूत्र बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार सड़कों पर एक्सीडेंट रोकने के लिए ट्रैफिक सिग्नल ज़रूरी है, उसी प्रकार समाज में शांति के लिए मन का 'आध्यात्मिक सिग्नल' आवश्यक है।
​उन्होंने राजयोग मेडिटेशन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्तियों को जगाता है और 'स्व-परिवर्तन' करता है, तभी 'विश्व-परिवर्तन' और एक दिव्य समाज का निर्माण संभव है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और ईश्वरीय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन बीके सुखेंद्र जी ने किया ।







 

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